मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का वह दिन अब भी लोगों की यादों में ताजा है। भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मोहन यादव मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, मंच पर भाजपा के बड़े नेता मौजूद थे और पूरा प्रदेश नई राजनीतिक तस्वीर देख रहा था। लेकिन उसी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान के बीच हुई एक छोटी सी बातचीत ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा था।
उस समय किसी ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन बाद में यही बातचीत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने शिवराज सिंह चौहान से कहा था “दिल्ली आइए, आपसे बात करनी है।”
सत्ता बदली, लेकिन शिवराज की लोकप्रियता कायम रही
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। लोगों को उम्मीद थी कि शिवराज सिंह चौहान ही फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान “मामा” की छवि गांवों से लेकर शहरों तक दिखाई दी थी।
लेकिन जब पार्टी ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया, तो कई समर्थक भावुक भी नजर आए। सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई लोगों ने लिखा कि शिवराज को अचानक हटाया जाना आसान फैसला नहीं था।
इसी बीच शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का शिवराज से अलग अंदाज में बातचीत करना कैमरों में कैद हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों ने उसी समय संकेत दे दिए थे कि पार्टी शिवराज सिंह चौहान को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
“दिल्ली आइए…” वाली बातचीत क्यों बनी खास?
शपथ ग्रहण के दौरान मंच पर मौजूद नेताओं के बीच सामान्य बातचीत चल रही थी। तभी पीएम मोदी शिवराज सिंह चौहान के करीब आए और उनसे कुछ देर बात की। सूत्रों और बाद में सामने आई चर्चाओं के मुताबिक प्रधानमंत्री ने उनसे दिल्ली आने को कहा था।
उस वक्त यह सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक संवाद लगा, लेकिन कुछ ही महीनों बाद तस्वीर साफ होती गई। लोकसभा चुनाव के बाद शिवराज सिंह चौहान को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली और उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया।
यही वजह है कि अब उस बातचीत को भाजपा की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
समर्थकों के बीच भावनात्मक माहौल
शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहे। खासकर ग्रामीण इलाकों, महिलाओं और किसान वर्ग में उनकी अलग पहचान बनी।
जब मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मिश्रित भावनाएं दिखीं। एक तरफ नई शुरुआत का उत्साह था, दूसरी तरफ शिवराज के समर्थकों में भावुकता भी दिखाई दी।
भोपाल से लेकर विदिशा और सीहोर तक कई जगह कार्यकर्ताओं ने पोस्टर लगाए थे जिनमें लिखा था कि “मामा दिलों में रहेंगे।”
भाजपा ने दिया बड़ा संकेत
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को संगठन और केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका देने की तैयारी पहले ही कर ली थी। इसी कारण मुख्यमंत्री पद बदलने के बावजूद पार्टी ने उन्हें पूरी तरह किनारे नहीं किया।
मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की, वहीं शिवराज को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रणनीति भी साथ-साथ चलती रही।
आज जब उस शपथ ग्रहण समारोह की तस्वीरें फिर चर्चा में आती हैं, तो पीएम मोदी की वह एक लाइन “दिल्ली आइए, आपसे बात करनी है” सिर्फ एक सामान्य वाक्य नहीं, बल्कि भाजपा की बड़ी राजनीतिक योजना का संकेत मानी जाती है।





