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मध्य प्रदेश के इस Labour Inspector को लौटना होगा वेतन, जानिए क्यों ?

By: दैनिक जाग्रत

Published On: Monday, May 25, 2026 7:25 AM

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न्यूज डेस्क, दैनिक जागृत।। मध्यप्रदेश के श्रम विभाग में एक बड़े प्रशासनिक फैसले ने हलचल बढ़ा दी है। विकलांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने के मामले में लंबे समय से विवादों में रहे श्रम निरीक्षक नवनीत कुमार पांडेय की सेवा शासन ने समाप्त कर दी है।

इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मामला सिर्फ एक कर्मचारी की नौकरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

कोर्ट के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक नवनीत कुमार पांडेय की नियुक्ति को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा था। यह मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

कोर्ट से मिले निर्देशों के बाद श्रम आयुक्त इंदौर संदीप जीआर द्वारा आदेश जारी कर उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि नौकरी के दौरान उन्हें मिले वेतन और अन्य शासकीय लाभों की रिकवरी की जाएगी।

कई जिलों में रह चुके हैं पदस्थ

नवनीत पांडेय पूर्व में रीवा जिले में पदस्थ रहे थे। बाद में उनका तबादला सीधी, कटनी सहित अन्य जिलों में किया गया। करीब दो वर्ष पहले उन्हें फिर से सिंगरौली में पदस्थ किया गया था।

श्रम विभाग में उनकी नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही थीं। विभागीय गलियारों में यह मामला काफी संवेदनशील माना जा रहा था, क्योंकि यह सीधे भर्ती प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ा हुआ था।

विभागीय महकमे में बढ़ी हलचल

सेवा समाप्ति और रिकवरी के आदेश सामने आने के बाद श्रम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हलचल बढ़ गई है। कई लोग इसे प्रशासनिक सख्ती के तौर पर देख रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों के बीच अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि भविष्य में नियुक्तियों और प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया और ज्यादा कठोर हो सकती है। वहीं कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया के लंबे संघर्ष के बाद आया बड़ा फैसला मान रहे हैं।

सिंगरौली में भी बना चर्चा का विषय

सिंगरौली में पदस्थापना के दौरान नवनीत पांडेय का नाम कई बार स्थानीय चर्चाओं में आया था। अब सेवा समाप्ति की खबर सामने आने के बाद जिले में भी यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

लोगों का कहना है कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और दस्तावेजों की सही जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसी घटनाएं सीधे युवाओं के भरोसे को प्रभावित करती हैं।

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