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खतरे में एशिया की सबसे बड़ी ‘लोटस वैली’, 300 एकड़ में फैले कमल के पार्क पर जलकुंभी का कब्जा,एक चौथाई हिस्से में बचे कमल के फूल

By: दैनिक जाग्रत

Published On: Friday, May 22, 2026 4:04 AM

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  • गुलावट के कमल की कई राज्यों में मांग, 80-90 लाख का सालाना कारोबार पिछले दो वर्षों से 20 लाख में सिमटा
  • पर्यटकों के आने से यहां के ग्रामीणों को होती है 40 से 45 लाख सालाना की अतिरिक्त आय
  • इससे जुड़े 1200 परिवारों को रोजी-रोटी का संकट
  • देश-विदेश से हर वर्ष यहां की खूबसूरती निहारने पहुंचते हैं लाखों पर्यटक
  • जलकुंभी हटा दी गई तो फिर गुलजार हो जाएगा लोटस वैली

दैनिक जाग्रत , इंदौर : देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से 25 किलोमीटर दूर ग्राम गुलावट स्थित एशिया की सबसे बड़ी लोटस वैली के पूरी तरह से समाप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। तीन सौ एकड़ में फैले इस कमल के पार्क में अब एक-चौथाई हिस्से में ही खूबसूरत फूल दिखाई दे रहे हैं। अगर प्रशासन ने इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो शायद अगले कुछ वर्षों में कमल के फूलों का यह खूबसूरत पार्क पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। इतना ही नहीं, इससे जुड़े लगभग 1200 परिवारों से रोजी-रोटी भी छिन जाएगी।

गंभीर नदी पर बनी इस झील में कमल के फूलों की खेती से यहां के किसानों को हर वर्ष करीब 80 से 90 लाख रुपये तक की आमदनी होती है, लेकिन पिछले दो वर्षों से सिमटकर 20 लाख रुपये तक रह गई है। वहीं यहां आने वाले पर्यटकों से भी होने वाली 40 से 50 लाख रुपये की आमदनी भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

बता दें गुलावट गांव में एशिया की सबसे बड़ी कमल घाटी है और घने जंगल से घिरी हुई है, जिसके चारों ओर छोटे-छोटे तालाब हैं, जो कमल से ढंके हुए हैं। इसके लिए पानी का स्रोत पास में स्थित यशवंत सागर बांध है। यह घाटी सालभर बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है। गुजरात के दाहोद से लाकर इस झील में कमल के बीज डाले गए हैं। कमल की खेती से ग्रामीणों पर लक्ष्मी की कृपा बरस रही है। झील में सबका एरिया बंटा हुआ है। ग्रामीण अपने-अपने हिस्से के कमल निकालकर बाजारों में बेचते हैं।

 

कमल घाटी के फूलों की दिल्ली, मुंबई व राजस्थान सहित कई राज्यों में मांग

यहां के एक किसान हरिओम केवट बताते हैं कि मई-जून में जब इस क्षेत्र में पानी नहीं होता है, तब कमल के बीज रोपे जाते हैं और यहां से निकलने वाले फूल इंदौर शहर के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई तक सप्लाई किए जाते हैं। इस साल दीपावली पर करीब ढाई से तीन लाख कमल के फूलों को मांग पर भेजा गया है। इससे हर वर्ष 80 से 90 लाख रुपये का कारोबार किया जाता है।

हम तालाबों को लीज पर लेकर मछली पालन और कमल की खेती करते हैं। हमें अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। हालांकि पिछले दो वर्षों से पूरे पानी में जलकुंभी फैलने से कमल की खेती और मछली पालन में भारी परेशानी हो रही है। जलकुंभी ने कमल की एक तिहाई खेती को नष्ट कर दिया है तो वहीं मछली पकड़ने के लिए जाल फेंकने के कार्य से भारी परेशानी हो रही है। ऐसे में हमारे परिवारों को अब रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। अगर ऐसा ही रहा तो हम भूखे मर सकते हैं।

जंगल में लगे पेड़ भी सूख रहे, मिट्टी नहीं डाली तो सब नष्ट हो जाएगा

दूसरे किसान मुकेश केवट ने बताया कि लोटस वैली में जलकुंभी सबसे बड़ी समस्या है। इसके कारण कमल के फूल खत्म होते जा रहे हैं। त्योहारों पर गुजरात और छत्तीसगढ़ के शहरों में भी फूलों की सप्लाई की जाती है। जंगल में लगे पेड़ भी सूख रहे हैं। यदि मिट्टी नहीं डाली गई तो जंगल खत्म हो जाएगा।

प्रशासन को इस बारे में कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई अफसर सुनने को तैयार नहीं है। हालांकि, लोटस वैली में नगर निगम के गार्ड के साथ गांव वाले और नाव ग्रुप के मेंबर मौजूद रहते हैं। ये वैली में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के साथ अन्य व्यवस्थाएं मुहैया कराते हैं।

ग्रामीणों का दर्द, सरकार ने यहां के लिए कुछ नहीं किया

ग्रामीणों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल को लेकर सरकार ने यहां कुछ नहीं किया। हां, झील पर पुल जरूर बनाया है, जो ग्रामीणों के साथ पर्यटकों के भी काम आता है। आसपास के किसान लोटस वैली में कमल की खेती करते हैं। यहां के फूल देश के महानगरों तक भेजे जाते हैं। अब कुछ ग्रामीण वहां नाव से पर्यटकों को झील में घुमाते हैं। कुछ ग्रामीणों ने वहां नाश्ते-पानी की दुकानें लगा ली हैं।

इसके लिए प्राकृतिक नजारों से भरपूर होने के कारण यहां सजी-संवरी गाड़ियों, झूलों, मचानों आदि पर बैठकर लोग फोटो सूट कराते हैं। हार्स राइडिंग की सुविधा भी ग्रामीणों ने ही उपलब्ध कराई है। प्री वेडिंग शूट के लिए भी युवा लोटस वैली पहुंचते हैं।

पहले भी संवारने के प्रयास हो चुके

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सांसद रहते गुलावट के विकास के लिए योजना बनवाई थी। हालांकि प्रोजेक्ट अमल में नहीं आ सका। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने भी यहां सरकारी जमीन मांगी थी, जो नहीं मिल पाई, जिससे काम आगे नहीं बढ़ सका। लोटस वैली को पर्यटन के रूप में विकसित करने में मप्र पर्यटन बोर्ड ने हाथ बढ़ाया है। हालांकि इस मामले में इंदौर जिला प्रशासन की तरफ से अब तक पर्यटन बोर्ड को कोई जवाब नहीं भेजा गया है और न कोई जमीन ढूंढी गई है।

जलकुंभी हटाने के लिए नगर निगम के अफसरों से बात करूंगा। इस पर काम शुरू करवाता हूं। हातोद में बायपास बनाने को लेकर प्रस्ताव भी दिया गया है। ताकि रोड की सुविधा भी बढ़ाई जा सके।

  • शंकर लालवानी, सांसद, इंदौर

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